'धर्मार्थकाममोक्षाख्या...' का अर्थ: रसराज (पारद) की कृपा से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है, इसमें लेशमात्र संदेह नहीं।
रसार्णव तंत्र का यह श्लोक इस प्रकार है: धर्मार्थकाममोक्षाख्या पुरुषार्थश्चतुर्विधा:।
सिद्ध्यन्ति नात्र सन्देहो रसराजप्रसादत: अर्थ: 'रसराज (पारद) की कृपा से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष – इन चारों प्रकार के पुरुषार्थों की सिद्धि होती है, इसमें लेशमात्र भी संदेह नहीं है।