न्यास और ध्यान विधि
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असितांग भैरव का ध्यान कहाँ करना चाहिए?
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संक्षिप्त उत्तर
असितांग भैरव का ध्यान हृदय या भ्रूमध्य (भौंहों के बीच) में करना चाहिए — उनके रक्त ज्वाल जटा, श्वान वाहन और लोक रक्षक स्वरूप का मानसिक चित्र बनाएं।
साधक को ध्यान श्लोक के अनुसार, असितांग भैरव के रक्त ज्वाल जटा वाले, श्वान वाहन पर आरूढ़ और लोक रक्षक स्वरूप का हृदय या भ्रूमध्य में ध्यान करना चाहिए।
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