साधना दर्शन
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ध्यान और पूजा में क्या संबंध है?
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संक्षिप्त उत्तर
सम्बंध: पूजा=बाह्य ध्यान, ध्यान=आन्तरिक पूजा। पूजा→ध्यान (तैयारी→चरम)। गीता 9.27: सब अर्पित=पूजा=ध्यान। क्रम: बाह्य पूजा→मानस पूजा→ध्यान→समाधि। पंचसूत्र: इज्या(पूजा)+योग(ध्यान)=एक प्रक्रिया। दोनों=भगव
ध्यान और पूजा = एक ही सिक्के के दो पहलू — पूजा = बाह्य ध्यान, ध्यान = आन्तरिक पूजा।
पूजा = ध्यान की तैयारी: पूजा (बाह्य क्रिया) → मन को भगवान की ओर मोड़ती → ध्यान (आन्तरिक) सहज। बिना पूजा सीधे ध्यान = कठिन (मन तैयार नहीं)।
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