ध्यान vs प्रार्थना = दो मार्ग, एक लक्ष्य: | विषय | प्रार्थना | ध्यान | |-------|---------|------| | दिशा | मैं → ईश्वर (बोलना) | ईश्वर → मैं (सुनना) | | क्रिया | मांगना/बोलना/विनती | चुप रहना/सुनना |
पहले बोलो (प्रार्थना) → फिर सुनो (ध्यान)। सार: 'प्रार्थना = ईश्वर से बात। ध्यान = ईश्वर को सुनना। ' दोनों = आवश्यक।