ध्यान साधना
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ध्यान और प्रार्थना में क्या अंतर है?
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संक्षिप्त उत्तर
प्रार्थना: मैं→ईश्वर (बोलना), द्वैत, भक्ति। ध्यान: ईश्वर→मैं (सुनना), अद्वैत, शांति। 'प्रार्थना=बात करना। ध्यान=सुनना।' सर्वोत्तम: पहले बोलो→फिर सुनो।
ध्यान vs प्रार्थना = दो मार्ग, एक लक्ष्य: | विषय | प्रार्थना | ध्यान | |-------|---------|------| | दिशा | मैं → ईश्वर (बोलना) | ईश्वर → मैं (सुनना) | | क्रिया | मांगना/बोलना/विनती | चुप रहना/सुनना |
पहले बोलो (प्रार्थना) → फिर सुनो (ध्यान)। सार: 'प्रार्थना = ईश्वर से बात। ध्यान = ईश्वर को सुनना। ' दोनों = आवश्यक।
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