ध्यान साधना
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ध्यान और समाधि में क्या भेद है?
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संक्षिप्त उत्तर
ध्यान: 'मैं ध्यान कर रहा' (ध्याता-ध्येय अलग, प्रयास, सीमित)। समाधि: 'मैं' विलय (त्रिपुटी एक, प्रयास-रहित, कालातीत)। योगसूत्र: ध्यान=निरंतर प्रवाह, समाधि=केवल ध्येय शेष। उपमा: ध्यान=तेल धारा, समाधि=नदी
ध्यान और समाधि = क्रमिक अवस्थाएँ — ध्यान गहरा होकर समाधि बनता है। दोनों भिन्न परंतु अभिन्न।
योगसूत्र अनुसार: ध्यान (Dhyana — 7वाँ अंग): योगसूत्र 3। 2: 'तत्र प्रत्ययैकतानता ध्यानम्' — एक विषय पर चित्त का निरंतर, अविच्छिन्न प्रवाह।
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