ध्यान से आध्यात्मिक जागरण — चित्त-शुद्धि → कुंडलिनी-जागरण (मूलाधार से सहस्रार) → समाधि के क्रम से होता है। मुण्डकोपनिषद (2/2/8) — ब्रह्म-दर्शन से हृदय-ग्रंथि टूटती है, संशय और कर्म नष्ट होते हैं। गीता
ध्यान से आध्यात्मिक जागरण कैसे होता है? आध्यात्मिक जागरण की परिभाषा: आध्यात्मिक जागरण = 'मैं केवल शरीर-मन नहीं — मैं शुद्ध, अनंत चेतना हूँ' — इस सत्य का प्रत्यक्ष अनुभव।