ध्यान साधना
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ध्यान से करुणा कैसे बढ़ती है?
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संक्षिप्त उत्तर
ध्यान→करुणा: (1) अहंकार विलय→भेद कम (2) अनाहत चक्र खुलना (3) योगसूत्र 1.33: 'दुःखी पर करुणा=चित्त प्रसन्न' (4) साक्षी भाव→सच्ची करुणा (5) एकता बोध (सब एक) (6) मन शांत→हृदय सुनाई। अभ्यास: मैत्री ध्यान
ध्यान और करुणा का गहरा सम्बंध है — ध्यान करुणा उत्पन्न करता है और करुणा ध्यान को गहरा करती है। ध्यान से करुणा कैसे बढ़ती है: 1।
अहंकार विलय: ध्यान में 'मैं' (अहंकार) क्षीण होता है। जब 'मैं' कम = 'दूसरे' और 'मैं' का भेद कम = स्वाभाविक करुणा।
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