सप्तशती के तीन रहस्य हैं — प्राधानिक (देवी की मूल शक्ति), वैकृतिक (असुरों का आध्यात्मिक अर्थ) और मूर्ति रहस्य। तीनों असुर अंदर के शत्रु हैं — महिषासुर = अहंकार, मधु-कैटभ = काम-क्रोध, शुंभ-निशुंभ = अस्
दुर्गा सप्तशती के अंत में तीन रहस्य ग्रंथ हैं जो सप्तशती के गूढ़ अर्थ को समझाते हैं: तीन रहस्य: 1।
प्राधानिक रहस्य: ब्रह्मा जी विष्णु जी को देवी के मूल स्वरूप का रहस्य बताते हैं: - देवी ही 'प्रधान' (मूल प्रकृति) हैं - सृष्टि के पूर्व केवल देवी की शक्ति थी - महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती — ये तीनो