दुर्गा सप्तशती में 13 अध्याय और 700 श्लोक हैं। यह तीन चरित्रों में विभाजित है — प्रथम चरित्र (महाकाली, मधु-कैटभ वध), मध्यम चरित्र (महालक्ष्मी, महिषासुर वध) और उत्तम चरित्र (महासरस्वती, शुंभ-निशुंभ वध)
दुर्गा सप्तशती की संरचना अत्यंत सुव्यवस्थित और शास्त्रीय है: मूल संख्या: - अध्याय: 13 - श्लोक: 700 ('सप्तशती' = सात सौ) - पुराण: मार्कंडेय पुराण (अध्याय 81 से 93) तीन चरित्र (खंड): 1।
प्रथम चरित्र (1 अध्याय — अध्याय 1): - देवता: महाकाली - कथा: मधु-कैटभ वध - श्लोक संख्या: लगभग 120 - बीज: क्लीं 2।