दुर्गा सप्तशती पाठ के दौरान कवच किलक अर्गला का क्या महत्व है?
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संक्षिप्त उत्तर
कवच = बीज/रक्षा (शरीर सुरक्षा)। अर्गला = शक्ति/बाधा हटाना। कीलक = चाबी/फल प्राप्ति। क्रम: शापोद्धार→कवच→अर्गला→कीलक→13 अध्याय। बिना इनके = अधूरा। विकल्प: सिद्ध कुंजिका स्तोत्र (इनकी जरूरत नहीं)।
कवच, अर्गला और कीलक दुर्गा सप्तशती के 'छह अंग' (षडंग) में से तीन प्रमुख हैं (शेष तीन = तीन रहस्य): कवच (देवी कवचम्) = बीज: - अर्थ: देवी से शरीर के प्रत्येक अंग की रक्षा की प्रार्थना।
- कार्य: पाठक को सुरक्षा कवच प्रदान — नकारात्मक ऊर्जा, बाधा से रक्षा। - क्रम: सबसे पहले पढ़ें (बीज = मंत्र का मूल)।