गरुड़ पुराण: अकाल मृत्यु = प्रेत योनि (शेष आयु तक भटकना)। मुक्ति: विधिवत दाह, चतुर्दशी श्राद्ध, नारायण बलि, गया पिंडदान। विधिवत संस्कार + श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण।
गरुड़ पुराण के अनुसार दुर्घटना/अकाल मृत्यु (निर्धारित आयु से पहले) होने पर आत्मा की स्थिति विशेष होती है।
क्या होता है: - आत्मा की निर्धारित आयु शेष रहती है — वह प्रेत योनि में भटकती है। - अचानक मृत्यु = अधूरी इच्छाएँ/मोह = आत्मा भटकने का कारण।