एकादशी पारण: द्वादशी को प्रातःकाल शुभ मुहूर्त में। पद्म पुराण: पारण में आँवला और बेर अवश्य खाएं — उच्छिष्ट दोष मिटता है। स्वतः गिरे तुलसी पत्ते का सेवन कर व्रत पूर्ण।
जो भक्त एकादशी का व्रत रखते हैं, वे तुलसी विवाह के पश्चात रात्रि जागरण करते हैं।
व्रत का पारण (समापन) अगले दिन अर्थात् 'द्वादशी' को प्रातःकाल शुभ मुहूर्त में किया जाता है।