गणेश पूजा
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गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ 21 बार करने से क्या होता है?
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संक्षिप्त उत्तर
मूल ग्रंथ: 1 बार = विघ्न नाश, पंच पाप मुक्ति। 1000 बार = सर्व कामना सिद्धि (श्लोक 13)। चतुर्थी उपवास + जप = विद्यावान (श्लोक 14)। 21 बार (संकष्टी/बुधवार) = दोगुना फल — परंपरागत मान्यता (मूल ग्रंथ में
गणपति अथर्वशीर्ष अथर्ववेद से संबंधित एक उपनिषद है जो भगवान गणेश को परब्रह्म स्वरूप मानकर उनकी स्तुति करता है।
इसमें गणेश को सृष्टि के कर्ता, धर्ता और हर्ता बताया गया है।
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