गंगाजल से अभिषेक: जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं और जीव को कैवल्य (मोक्ष) प्राप्त होता है। गंगा = शिव की जटाओं में निवास करने वाली। प्रायः अभिषेक के अंत में गंगाजल चढ़ाते हैं।
गंगाजल (तीर्थोदक) से अभिषेक शांति पाठ के साथ किया जाता है। गंगा साक्षात् शिव की जटाओं में निवास करती है।
अभिषेक के अंत में गंगाजल से शिव को स्नान कराने से: — जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं — जीव को कैवल्य (मोक्ष) प्राप्त होता है।