भविष्य पुराण: गरीब हो तो केवल फलों का दान = गोदान के समान पुण्य। क्षमता अनुसार मंत्र-सहित या मंत्र-रहित दान सभी के लिए मान्य। यह पर्व सबसे समरस और समावेशी है।
यदि व्यक्ति दरिद्र है, तो वह केवल फलों का दान करके भी गोदान के समान पुण्य प्राप्त कर सकता है।
'भविष्य पुराण' स्पष्ट करता है कि वेदज्ञ ब्राह्मणों से लेकर शूद्रों तक सभी को संक्रांति के अवसर पर अपनी क्षमता अनुसार मन्त्र-सहित या मन्त्र-रहित स्नान-दान करने का पूर्ण अधिकार है।