गायत्री मंत्र के 24 अक्षर 24 अलग-अलग देवताओं (जैसे अग्नि, सूर्य, विष्णु, शिव, सरस्वती) का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके जप से शरीर की 24 ग्रंथियां और इन सभी देवताओं की शक्तियां जाग्रत होती हैं।
गायत्री मंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं। ) वेदों का मुकुटमणि है।
इसे महामंत्र इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके 24 अक्षरों में 24 भिन्न-भिन्न देवताओं की ऊर्जा और 24 ऋषियों का तपोबल समाहित है।