गीता प्रस्थानत्रयी का स्तंभ, साक्षात् ईश्वर-वाणी और वेदांत का सार है। यह सभी योग-मार्गों का समन्वय करने वाला, सर्वकालिक और सार्वभौमिक ग्रंथ है। यह मानव को विषाद से ज्ञान की ओर ले जाता है।
गीता का आध्यात्मिक महत्व गीता की अद्वितीय स्थिति: श्रीमद्भगवद्गीता प्रस्थानत्रयी — उपनिषद, ब्रह्मसूत्र और गीता — का एक स्तंभ है।
यह एकमात्र ग्रंथ है जो साक्षात् परमात्मा (श्रीकृष्ण) के मुख से उच्चरित हुआ। इसीलिए इसे 'गीतोपनिषद' और 'ब्रह्मविद्या-योगशास्त्र' कहा जाता है।