घर मंदिर
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घर में मंदिर बनाने के वास्तु नियम क्या हैं?
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संक्षिप्त उत्तर
ईशान कोण सर्वोत्तम। मुख पूर्व/उत्तर। नाभि-नेत्र ऊंचाई। शौचालय ऊपर/नीचे नहीं। शयनकक्ष बचें। लकड़ी/संगमरमर। प्रतिदिन सफाई+दीपक। प्रकाश+वायु।
घर मंदिर वास्तु नियम: 1। दिशा: ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) = सर्वोत्तम। उत्तर/पूर्व भी शुभ।
मुख: मूर्ति = पश्चिम/दक्षिण दीवार पर (भक्त पूर्व/उत्तर मुख)। ऊंचाई: मूर्ति = भक्त नाभि→नेत्र स्तर। स्थान: शौचालय ऊपर/नीचे/पीछे नहीं।
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