गोत्र उस प्राचीन ऋषि का नाम है जिनसे हमारी पितृ वंश-परंपरा जुड़ी है। यह वंश-पहचान, संकल्प-विधान, विवाह-निर्धारण और पितृ-तर्पण में अनिवार्य है। मुख्य सात गोत्र सप्तर्षियों के नाम पर हैं।
गोत्र एक अत्यंत प्राचीन वैदिक व्यवस्था है जो किसी व्यक्ति के मूल ऋषि-वंश की पहचान कराती है।
'गोत्र' शब्द का अर्थ है — उस ऋषि का वंश जिससे हमारी पितृ परंपरा अटूट क्रम में जुड़ी हुई है।