माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए तप किया। सखी ने उन्हें वन में छुपाया (हरतालिका = हरण + सखी)। भाद्रपद शुक्ल तृतीया को उन्होंने रेत का शिवलिंग बनाकर जागरण किया और शिव ने प्रकट होकर उनकी कामना प
हरतालिका तीज की कथा स्वयं भगवान शिव ने माता पार्वती को सुनाई थी। शिव पुराण और अन्य ग्रंथों में यह कथा विस्तार से वर्णित है।
हिमालय पर्वत की पुत्री पार्वती बचपन से ही भगवान शिव को पति के रूप में पाने की इच्छा रखती थीं।