हत्यारे को — ब्रह्महत्यारे को वैतरणी, निर्दोष-हत्यारे को लोहशंकु नरक (कीलें), गोहत्यारे को रक्त-गड्ढे में काँटे, जीव-हत्यारे को क्रीमिक नरक (कीट)। पुनर्जन्म में स्वयं उसी हिंसा का शिकार।
गरुड़ पुराण के चतुर्थ अध्याय में हत्या के विभिन्न प्रकारों और उनके दंडों का विस्तृत वर्णन है।
ब्रह्महत्या — 'जो ब्राह्मणों की हत्या करने वाले हैं, वे वैतरणी में महान दुःख भोगते हैं। ' ब्रह्महत्या सबसे भीषण पाप है।