गरुड़ पुराण और भागवत के अनुसार दैत्यराज बलि के मस्तिष्क से वज्र (हीरा) की उत्पत्ति हुई।
गरुड़ पुराण और श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णित कथा के अनुसार, जब दैत्यराज बलि का शरीर भगवान के चरण स्पर्श से विभिन्न रत्नों में परिवर्तित हुआ, तब उनके मस्तिष्क से वज्र (हीरा) की उत्पत्ति हुई।