गरुड़ पुराण में जलदान सर्वसुलभ और अनिवार्य दान है। यममार्ग पर जल का अभाव है — जलदान करने वाले को राहत मिलती है। तर्पण का जल प्रेत की प्यास बुझाता है। गंगाजल देना सर्वश्रेष्ठ जलदान है।
गरुड़ पुराण में जलदान का महत्व अन्नदान के साथ-साथ सर्वोपरि बताया गया है।
यमदूतों का प्रश्न — गरुड़ पुराण के तृतीय अध्याय में यमदूत पापियों से कहते हैं — 'सुलभ होने वाले भी जल और अन्न का दान कभी क्यों नहीं दिया?' यह दोनों दानों की समान अनिवार्यता को दर्शाता है।