यह सोरठा श्रीगणेशजी की स्तुति है। इसमें गणेशजी को 'गन नायक' (गणों के स्वामी), 'करिबर बदन' (हाथी के मुखवाले) और 'बुद्धि रासि सुभ गुन सदन' (बुद्धि और शुभ गुणों के धाम) कहा गया है।
यह सोरठा श्रीगणेशजी की स्तुति है। यह बालकाण्ड की पहली अवधी सोरठा है। पूरी सोरठा है — 'जो सुमिरत सिधि होइ गन नायक करिबर बदन।
करउ अनुग्रह सोइ बुद्धि रासि सुभ गुन सदन॥' इसका अर्थ — जिनके स्मरण करनेसे सब कार्य सिद्ध होते हैं, जो गणों के स्वामी हैं और सुन्दर हाथीके समान जिनका मुख है, वे ही बुद्धिके राशि और शुभ गुणोंके धाम (श्र