काशी में कुक्कुटेश्वर शिवलिंग को 'गुप्त लिंग' क्यों कहा जाता है?
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संक्षिप्त उत्तर
इसे 'गुप्त लिंग' इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह गुह्य विद्या और साधना प्रधान है। इसकी ऊर्जा केवल विशिष्ट मंत्रों, ध्यान और ब्रह्म मुहूर्त में ही जाग्रत होती है, जो आत्म-जागृति के लिए है।
शैव दर्शन और तन्त्र-शास्त्र के अनुसार, कुक्कुटेश्वर को "गुप्त लिंग" इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका संबंध "गुह्य विद्या" (Esoteric Knowledge) और साधना से है।
गुप्त लिंग का अर्थ भौतिक रूप से छिपा होना नहीं, बल्कि इसकी ऊर्जा का विशिष्ट होना है।