अज्ञा चक्र (भ्रूमध्य) = 'तीसरी आँख'। ॐ का 'म' = अज्ञा चक्र में गूंजे। अर्थ: शारीरिक आँख नहीं — अंतर्ज्ञान, विवेक, आध्यात्मिक दृष्टि सक्रिय। क्रमिक प्रक्रिया — वर्षों की साधना। गुरु आवश्यक। भ्रामक दावो
'तीसरी आँख' = अज्ञा चक्र (भ्रूमध्य, दोनों भौहों के मध्य)। ॐ जप और अज्ञा चक्र का गहरा संबंध है: शास्त्रीय आधार: 1।
ॐ का 'म' ध्वनि अज्ञा चक्र में गूंजती है — अज्ञा चक्र ॐ से सीधे संबंधित। पतंजलि: 'तस्य वाचकः प्रणवः' — ॐ ईश्वर का वाचक।