स्तोत्र एवं पाठ
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किलक स्तोत्र का महत्व दुर्गा सप्तशती में
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संक्षिप्त उत्तर
सप्तशती तीसरा अंग; 'कील हटाना' — शिव ने लगाई कील (दुरुपयोग रोकना); कीलक=हटाना→शक्ति मुक्त। कवच(रक्षा)→अर्गला(ताला)→कीलक(कील)→सप्तशती=पूर्ण। ~3-5 min।
किलक स्तोत्र = दुर्गा सप्तशती का तीसरा अंग (कवच→अर्गला→कीलक→सप्तशती)। अर्थ: 'कीलक' = कील/पिन निकालना।
शिव ने सप्तशती में 'कील' (lock) लगाई थी ताकि अयोग्य व्यक्ति शक्ति का दुरुपयोग न करे। कीलक स्तोत्र = वह कील हटाता है → सप्तशती शक्ति मुक्त।
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