कुंभकर्ण ने तपस्या से ब्रह्माजी को प्रसन्न किया और 'इंद्रासन' माँगना चाहा। पर देवताओं की प्रार्थना पर सरस्वती उसकी जिह्वा पर विराजी, जिससे मुख से 'निद्रासन' निकला। ब्रह्माजी ने तथास्तु कहा और वह छह-छह
कुंभकर्ण रावण का अनुज और रामायण का एक महाबलशाली पात्र था।
उसके छह महीने सोने के पीछे एक रोचक कथा है जो देवताओं की चतुराई और सरस्वती की माया से जुड़ी है।