कुंभिपाक में — खौलते तेल में उबाला जाना, जलती रेत में फेंका जाना, मृत्यु नहीं — बार-बार यातना। 'आत्मा पकाई जाती है पर नष्ट नहीं होती।' पाप-फल समाप्त होने तक जारी।
गरुड़ पुराण में कुंभीपाक नरक के कष्टों का अत्यंत भयावह वर्णन है। खौलते तेल में — 'कुम्भीपाक नरक में आत्मा को गर्म तेल में उबाला जाता है।
' यह तेल इतना खौलता है कि उसमें पड़ते ही असहनीय पीड़ा होती है।