हाँ, गरुड़ पुराण के अनुसार जीव शरीर छोड़ते समय अपने घर को देखता है। मृत्यु के बाद 13 दिनों तक घर के आसपास भटकता है, परिजनों को देखता है परंतु वे उसे नहीं देख पाते। यह अनुभव अत्यंत कष्टकारी होता है।
हाँ, गरुड़ पुराण में इस विषय का स्पष्ट उल्लेख है। मृत्यु के तुरंत बाद जब जीवात्मा शरीर से निकलती है, तो वह अपने घर को देख सकती है।
गरुड़ पुराण के प्रथम अध्याय में लिखा है — 'वह अंगुष्ठमात्र प्रमाण का पुरुष अपने घर को देखता हुआ यमदूतों के द्वारा यातना देह से ढककर गले में बलपूर्वक पाशों से बाँधकर सुदूर यममार्ग यातना के लिए ले जाया