हाँ, जीवात्मा पुनर्जन्म लेती है। भगवद्गीता, गरुड़ पुराण और कठोपनिषद सभी इसकी पुष्टि करते हैं। कर्मों और अंतिम विचारों के आधार पर अगला जन्म निर्धारित होता है। मोक्ष प्राप्ति पर यह चक्र समाप्त होता है।
हाँ, सनातन शास्त्रों में पुनर्जन्म का सिद्धांत अत्यंत दृढ़ता से प्रतिपादित किया गया है।
भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने स्पष्ट कहा है — 'वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि' — जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र छोड़कर नए वस्त्र धारण करता है, वैसे ही आत्मा पुराने शरीर को त्यागकर नए शरीर