हाँ। महापापी को एक नरक से दूसरे नरक, फिर अधम योनि — यह श्रृंखला लंबी चलती है। 'करोड़ों कल्पों में भी बिना भोगे कर्म नष्ट नहीं होता।' महापाप के लिए दंड-काल सर्वाधिक लंबा है।
गरुड़ पुराण में यह सिद्धांत बताया गया है कि पाप की मात्रा और गंभीरता के अनुसार दंड की अवधि भी लंबी होती है।
एक नरक से दूसरे नरक — गरुड़ पुराण में — 'सदा पापकर्मों में लगे हुए, शुभ कर्म से विमुख प्राणी एक नरक से दूसरे नरक को, एक दुःख के बाद दूसरे दुःख को तथा एक भय के बाद दूसरे भय को प्राप्त होते हैं।