भक्ति मार्ग से तंत्र पूजन और गुरु दीक्षा के साथ साधना सुरक्षित है। खतरा तब है जब: बिना गुरु उच्च साधना, नकारात्मक उद्देश्य (वशीकरण, मारण) या मानसिक अस्थिरता में साधना की जाए। तंत्र स्वयं अग्नि की तरह
यह सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है।
तंत्र शास्त्र स्वयं इसका उत्तर देता है: महानिर्वाण तंत्र का स्पष्ट वचन: 'तंत्र न पापम् न पुण्यम्' — तंत्र स्वयं न पाप है, न पुण्य।