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आध्यात्मिक साधना में अहंकार कैसे बाधक बनता है?

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अहंकार बाधक: (1) 'मैं'=ईश्वर से दीवार (2) आध्यात्मिक अहंकार=सबसे खतरनाक (सूक्ष्म) (3) गुरु अस्वीकार (4) सिद्धियों में उलझना (5) तुलना। गीता: अहंकार=आसुरी। कबीर: 'जब मैं था तब हरि नहीं।' उपाय: निःस्वार्थ सेवा, गुरु-शरणागति, कृतज्ञता, सत्संग, साक्षी भाव।

  1. 1सेवा (निःस्वार्थ): सेवा = 'मैं' का विलय। झाड़ू लगाना, भंडारा सेवा = अहंकार नाशक।
  2. 2गुरु-शरणागति: गुरु = दर्पण — अहंकार दिखाता है।
  3. 3कृतज्ञता: 'सब ईश्वर की कृपा — मेरा कुछ नहीं।'
  4. 4सत्संग: संतों की संगति = अहंकार स्वतः कम।
  5. 5मृत्यु-चिन्तन: 'एक दिन सब छूट जाएगा' — अहंकार निरर्थक।
  6. 6साक्षी भाव: अहंकार को 'देखें' — देखते ही कमजोर।
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आध्यात्मिक साधना

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