आत्महत्या करने वाले की आत्मा को क्या होता है?
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शास्त्रों में आत्महत्या महापाप है। ईशोपनिषद (3): आत्महन् अंधकारमय लोक प्राप्त करते हैं। गरुड़ पुराण: प्रेत योनि में भटकना। प्रारब्ध भोगने शेष रहता है। परिवार श्राद्ध-तर्पण कराए। मानसिक कष्ट में विशेषज्ञ से सहायता लें।
- 1ईशोपनिषद (श्लोक 3): *'असुर्या नाम ते लोका अन्धेन तमसाऽवृताः'* — जो आत्मा का हनन करते हैं वे अंधकारमय लोकों को प्राप्त होते हैं। 'आत्महन्' (आत्मा का हनन करने वाला) — यह आत्महत्या और आत्मज्ञान की उपेक्षा दोनों पर लागू होता है।
- 2गरुड़ पुराण — आत्महत्या करने वाले की आत्मा को प्रेत योनि में भटकना पड़ता है। उसे शांति नहीं मिलती क्योंकि उसके प्रारब्ध कर्म अभी भोगने शेष थे जो अधूरे रह गए।
- 3भगवद्गीता — शरीर ईश्वर द्वारा प्रदत्त है, इसे स्वयं नष्ट करना ईश्वरीय व्यवस्था के विरुद्ध है। आत्मा अमर है (गीता 2.20: *'न जायते म्रियते वा कदाचिन्'*) — शरीर नष्ट करने से दुख समाप्त नहीं होता, प्रारब्ध भोगने शेष रहता है।
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