अखंड जप क्या होता है और इसे कैसे करें?
की चेकलिस्ट
अखंड जप = बिना टूटे निरंतर। व्यक्तिगत (12-24 घंटे) या सामूहिक (बारी-बारी, 24/7)। संकल्प → अखंड ज्योत → निरंतर जप → ब्रह्मचर्य → हवन/दान से समापन। नवरात्रि 9 दिन अखंड जप प्रचलित। शक्ति कई गुना।
- 1व्यक्तिगत अखंड जप: एक व्यक्ति 12/24 घंटे निरंतर जप करे (शौचालय हेतु अल्प विराम मान्य, मानसिक जप जारी)।
- 2सामूहिक अखंड जप: कई भक्त बारी-बारी से जप करें — 24 घंटे/7 दिन/9 दिन निरंतर। एक व्यक्ति थके तो दूसरा तुरंत आरंभ — जप कभी न रुके।
- 3संकल्प: अवधि (24 घंटे/3 दिन/9 दिन), मंत्र, उद्देश्य निश्चित करें।
- 4स्थान: एक स्थान पर दीपक (अखंड ज्योत) जलाएं। पूजा स्थापना।
- 5जप: निर्धारित मंत्र का निरंतर जप — वाचिक, उपांशु या मानसिक।
- 6भोजन: सात्विक, हल्का, जप में बाधा न हो।
- 7ब्रह्मचर्य: अनुष्ठान काल में अनिवार्य।
- 8समापन: संकल्पित अवधि पूर्ण होने पर हवन, दान, प्रसाद वितरण।
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