अमावस्या को पूजा करने का क्या विशेष विधान है
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अमावस्या पूजा: पितृ तर्पण (तिल-जल, दक्षिण मुख) प्रमुख। श्राद्ध, गाय-कौवे-कुत्ते को भोजन। शनिश्चरी = शनि पूजा + पीपल। दान + ब्राह्मण भोजन। शुभ कार्य वर्जित। विशेष: सोमवती, शनिश्चरी, सर्वपितृ, माघ अमावस्या।
- 1प्रातः स्नान → तर्पण → दान।
- 2गाय, कुत्ते, कौवे को भोजन।
- 3ब्राह्मण भोजन।
- 4मन्दिर दर्शन, दीपदान।
- 5सात्विक आहार।
- 6शुभ/मांगलिक कार्य न करें।
- 7तामसिक भोजन, मद्यपान वर्जित।
- 8बाल/नाखून न काटें (कुछ परम्पराओं में)।
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