अनजाने में किया गया पाप भी लगता है क्या?
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हाँ, अनजाने पाप का फल भी मिलता है (मनुस्मृति) — जैसे अग्नि अनजाने छूने पर भी जलाती है। पर जानबूझकर किए पाप से हल्का। प्रायश्चित (तप, जप, दान) से क्षमा संभव। गीता (4.37): ज्ञान की अग्नि सभी कर्मों को भस्म करती है।
- 1ज्ञात पाप (जानबूझकर) — सबसे गंभीर, कठोर फल।
- 2अज्ञात पाप (अनजाने में) — फल मिलता है पर हल्का।
- 3बाध्य पाप (मजबूरी में) — परिस्थितिवश, फल होता है पर प्रायश्चित से क्षमा संभव।
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