बीज मंत्र को बीज क्यों कहते हैं इसका रहस्य क्या है?
की चेकलिस्ट
बीज = बीज से वृक्ष जैसे, बीज मंत्र जप से देवता शक्ति प्रकट। सम्पूर्ण मंत्र का सारतत्व। अक्षर रहस्य: श्रीं = श(लक्ष्मी)+र(ऐश्वर्य)+ई(तुष्टि)+ं(दुःखहरण)। शिव डमरू = 14 सूत्र = वर्णमाला बीज। प्रकट तभी = जप करो।
- 1वृक्ष-बीज उपमा: जैसे एक छोटे से बीज में विशाल वट वृक्ष छिपा होता है — बोने और सींचने (जप-साधना) से वह प्रकट होता है — वैसे ही एक-दो अक्षर के बीज मंत्र में सम्पूर्ण देवता शक्ति छिपी है। जप रूपी सिंचाई से वह शक्ति प्रकट होती है।
- 2सम्पूर्ण मंत्र का सार: बीज मंत्र किसी भी विस्तृत मंत्र का सारतत्व (essence) है — जैसे बीज वृक्ष का सार है। 'ॐ' = सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का बीज। 'ह्रीं' = सम्पूर्ण शक्ति का बीज। 'श्रीं' = सम्पूर्ण समृद्धि का बीज।
- 3अक्षर रहस्य: प्रत्येक बीज मंत्र के अक्षर में देवता शक्ति संकेतित है। उदा: 'श्रीं' में श=महालक्ष्मी, र=धन-ऐश्वर्य, ई=तुष्टि, अनुस्वार (ं)=दुःखहरण, नाद=विश्वमाता। एक अक्षर में सम्पूर्ण देवता।
- 4शिव सूत्र: भगवान शिव ने तांडव के बाद डमरू 14 बार बजाया — उससे 14 शिव सूत्र (माहेश्वर सूत्र) निकले जो सम्पूर्ण वर्णमाला के बीज हैं। इन्हीं वर्णों से मंत्र बने और मंत्रों से बीज मंत्र।
- 5ध्वनि ऊर्जा: बीज मंत्र विशिष्ट ध्वनि तरंगें उत्पन्न करते हैं जो शरीर के चक्रों (energy centers) को सक्रिय करती हैं। एक अक्षर = एक केन्द्रित ध्वनि = अधिक शक्तिशाली प्रभाव।
सम्पूर्ण उत्तर
विस्तृत प्रश्न पृष्ठ देखें
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
श्रेणी
मंत्र साधना
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।