भगवद्गीता के अनुसार आत्मा अमर है कैसे समझें
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गीता 2.20 — आत्मा अजन्मा, नित्य, शाश्वत। 2.23 — शस्त्र, अग्नि, जल, वायु कुछ नहीं कर सकते। 2.22 — शरीर बदलता है, आत्मा नहीं (वस्त्र उदाहरण)। 2.25 — अव्यक्त, अचिंत्य, अविकारी। सरल अर्थ: शरीर = बर्तन, आत्मा = आकाश — बर्तन टूटे तो आकाश नष्ट नहीं।
- 1अजन्मा और शाश्वत (2.20):
- 2अविनाशी (2.17):
- 3शस्त्र, अग्नि, जल, वायु से अप्रभावित (2.23-24):
- 4अच्छेद्य, अदाह्य, अक्लेद्य, अशोष्य (2.24):
- 5अव्यक्त और अचिंत्य (2.25):
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आत्मा और मोक्ष
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