भगवान दुखों को क्यों नहीं रोकते
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ब्रह्मसूत्र 2.1.34 — ईश्वर निर्दय नहीं; दुःख जीव के कर्मों से आता है। गीता 2.14 — सुख-दुःख अनित्य। अविद्या (अज्ञान) दुःख का मूल कारण। आत्मा दुःख से अप्रभावित (गीता 2.23)। ईश्वर ने मोक्ष मार्ग दिया — शाश्वत दुःख मुक्ति।
- 1गीता 2.14 — 'मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः। आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत।।' — सुख-दुःख अनित्य (temporary) हैं, आते-जाते रहते हैं। सहन करो।
- 2गीता 5.15 — भगवान किसी के पाप या पुण्य को नहीं लेते। अज्ञान से ज्ञान ढका हुआ है — इसी से जीव मोहित होते हैं।
- 3दुःख आत्म-विकास और ज्ञान का साधन है।
- 4दुःख ही वैराग्य उत्पन्न करता है जो मोक्ष का मार्ग है।
- 5बुद्ध ने भी कहा — दुःख ही सत्य की खोज का प्रारंभ बिंदु है।
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