भगवान निराकार है या साकार हिंदू धर्म क्या कहता है
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हिंदू धर्म में भगवान निराकार भी हैं और साकार भी — दोनों सत्य, दोनों मान्य। उपनिषद = निराकार ब्रह्म; पुराण/गीता = साकार अवतार। तुलसीदास — 'सगुनहि अगुनहि नहिं कछु भेदा'। जैसे जल = निराकार, बर्फ = साकार — पदार्थ एक ही।
- 1गीता 12.3-5 — कृष्ण ने दोनों उपासनाओं को मान्य किया। निराकार कठिन, साकार सरल।
- 2रामचरितमानस (तुलसीदास) — 'सगुनहि अगुनहि नहिं कछु भेदा। गावहिं मुनि पुरान बुध वेदा।' — सगुण और निर्गुण में कोई भेद नहीं — ऐसा मुनि, पुराण और वेद कहते हैं।
- 3रामकृष्ण परमहंस — 'जल और बर्फ एक ही हैं। निराकार ब्रह्म भक्त की भक्ति से साकार हो जाता है।'
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