भक्ति के नौ प्रकार कौन से हैं
की चेकलिस्ट
नवधा भक्ति के नौ प्रकार हैं — श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन। यह श्रीमद्भागवत 7.5.23 में प्रह्लाद-वचन है। रामचरितमानस अरण्यकाण्ड में राम ने शबरी को अलग रूप में यही बताया।
- 1श्रवण — भगवान की कथा सुनना (उदाहरण — परीक्षित)
- 2कीर्तन — नाम-गुण गाना (उदाहरण — शुकदेव)
- 3स्मरण — निरंतर स्मरण (उदाहरण — प्रह्लाद)
- 4पादसेवन — चरण-सेवा (उदाहरण — लक्ष्मी)
- 5अर्चन — पूजा-अर्चना (उदाहरण — पृथु राजा)
- 6वंदन — नमस्कार-स्तुति (उदाहरण — अक्रूर)
- 7दास्य — सेवक-भाव (उदाहरण — हनुमान)
- 8सख्य — मित्र-भाव (उदाहरण — अर्जुन)
- 9आत्मनिवेदन — पूर्ण समर्पण (उदाहरण — बलि राजा)
- 10संतों का संग, 2. कथा में प्रेम, 3. गुरु-चरण-सेवा, 4. कपट-रहित गुण-गान, 5. मंत्र-जप दृढ़ विश्वास, 6. शील-संयम-वैराग्य, 7. जगत को राममय देखना, 8. यथालाभ संतोष, 9. सरल-छलरहित स्वभाव।
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श्रेणी
भक्ति एवं आध्यात्म
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