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धूमावती माता की साधना विधवा देवी की उपासना क्यों कहते हैं?

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धूमावती = सातवीं महाविद्या, 'विधवा देवी'। स्वरूप: वृद्ध, धूमिल वस्त्र, सूप, कौवा वाहन। कथा: पार्वती ने शिव निगले → धुएं से बाहर → विधवा श्राप। दार्शनिक: अशुभ में शुभ, वैराग्य/नश्वरता प्रतीक। अलक्ष्मी शांत → लक्ष्मी प्राप्ति। गुरु दीक्षा अनिवार्य। शनिवार/अमावस्या विशेष।

  1. 1स्वरूप: धूमावती का स्वरूप एक वृद्ध, श्वेत/धूमिल वस्त्र धारिणी, विधवा स्त्री का है। उनके हाथ में सूप (विन्नोइंग फैन) और कौवा उनका वाहन है।
  2. 2पौराणिक कथा: एक कथा के अनुसार एक बार देवी पार्वती को अत्यंत भूख लगी। शिव ने भोजन न दिया तो पार्वती ने स्वयं शिव को निगल लिया। शिव ने उनके शरीर से धूम (धुआं) के रूप में बाहर आकर उन्हें श्राप दिया कि 'तुम विधवा रूप धारण करोगी।' तभी से इस रूप को 'धूमावती' (धुएं वाली) कहते हैं।
  3. 3दार्शनिक अर्थ:
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दस महाविद्या

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