ध्यान और जप में क्या अंतर है?
की चेकलिस्ट
जप मंत्र की सक्रिय आवृत्ति है; ध्यान मन का शांत ठहराव। गीता (10/25) में जप को सर्वश्रेष्ठ यज्ञ कहा गया है। जप साधन है — जब जप गहरा होकर स्वतः रुक जाता है, तब ध्यान शुरू होता है। जप → मानसिक जप → अजपा-जप → ध्यान — यह क्रमिक यात्रा है।
- 1वाचिक जप — मुख से उच्चारण
- 2उपांशु जप — होंठ हिलते हों, पर ध्वनि न हो
- 3मानसिक जप — केवल मन में
- 4अजपा जप — श्वास के साथ स्वतः होने वाला 'सोऽहम्'
- 5ध्यान — जब जप अपने आप रुक जाए और केवल भाव-चेतना शेष रहे
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ध्यान साधना
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