दुर्गा सप्तशती पाठ के नियम क्या हैं?
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सप्तशती पाठ के नियम: स्नान, स्वच्छ वस्त्र, पूर्ण पाठ एक बैठक में, शुद्ध उच्चारण, पुस्तक भूमि पर न रखें। मांसाहार और मद्यपान वर्जित। अशुद्धि होने पर नवार्ण मंत्र का 108 बार जप करें।
- 1स्नान किए बिना पाठ न करें
- 2स्वच्छ वस्त्र — लाल, पीत या श्वेत
- 3पूजा में बैठने से पहले हाथ-पैर धोएं
- 4पूर्ण पाठ एक बैठक में — यदि संभव हो; बीच में न उठें
- 5शुद्ध उच्चारण — संस्कृत का स्पष्ट उच्चारण; गलत उच्चारण से बचें
- 6मन एकाग्र — पाठ के समय बात न करें
- 7पुस्तक को भूमि पर न रखें — आसन या चौकी पर
- 8पुस्तक पर पैर न लगाएं
- 9एक बार पाठ — नित्य या विशेष अवसर पर
- 10सप्त पाठ (7 बार) — विशेष कामना के लिए
- 11आधा पाठ नहीं — यदि पूरा पाठ न हो सके तो कम से कम एक चरित्र पूर्ण करें
- 12पाठ की संख्या पूर्ण करें — जो संख्या निश्चित की हो, वह पूरी करें
- 13स्वच्छ और शांत स्थान
- 14पूजा घर, मंदिर या शुद्ध स्थान
- 15शयन कक्ष में पाठ उचित नहीं
- 16प्रातःकाल — सर्वोत्तम
- 17ब्रह्ममुहूर्त या सूर्योदय के बाद
- 18रात्रि में भी पाठ हो सकता है — विशेषतः नवरात्रि की रात
- 19मांसाहार — पाठ काल में
- 20मद्यपान — सर्वथा वर्जित
- 21पर्युषित (बासी) भोजन — नहीं
- 22काम-क्रोध — पाठ काल में
- 23महिलाओं के लिए — मासिक धर्म में पाठ न करें (परंपरागत नियम)
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