हनुमान जी अमर क्यों हैं और आज कहाँ हैं
की चेकलिस्ट
हनुमान सप्त चिरंजीवियों में से एक — सीता, राम और ब्रह्मा के वरदान से अमर। कलियुग में विद्यमान — जहां राम कथा वहां हनुमान उपस्थित। गंधमादन पर्वत पर राम जप। महाभारत में भीम से भेंट और अर्जुन की ध्वजा पर विराजमान।
- 1सीता माता का वरदान — वाल्मीकि रामायण (सुंदरकांड) में सीता माता ने हनुमान को अशोक वाटिका में कहा — 'तुम चिरंजीवी रहो।'
- 2श्रीराम का वरदान — लंका विजय के बाद राम ने हनुमान को चिरंजीवी होने का वरदान दिया।
- 3ब्रह्मा का वरदान — बाल्यकाल में सूर्य को फल समझकर पकड़ने पर इंद्र ने वज्र से मारा, तब ब्रह्मा ने दीर्घायु और अमरत्व का वर दिया।
- 4भक्ति का प्रतिफल — हनुमान की अनन्य रामभक्ति ही उनके अमरत्व का मूल कारण है।
- 5कलियुग में उपस्थित — रामचरितमानस और अन्य ग्रंथों के अनुसार हनुमान जी कलियुग में भी विद्यमान हैं। जहां-जहां राम कथा होती है, वहां हनुमान जी अदृश्य रूप से उपस्थित रहते हैं।
- 6गंधमादन पर्वत — कुछ ग्रंथों में हनुमान का निवास गंधमादन पर्वत पर बताया गया है जहां वे निरंतर राम नाम का जप करते हैं।
- 7महाभारत में उपस्थिति — महाभारत (वन पर्व) में भीम और हनुमान की भेंट का वर्णन है। हनुमान ने भीम को अपना लघु रूप दिखाया और अर्जुन के रथ की ध्वजा पर विराजमान रहे।
- 8लोक मान्यता — भक्तजन मानते हैं कि संकट में हनुमान जी का स्मरण करने पर वे प्रकट होते हैं। 'संकटमोचन' नाम इसी विश्वास पर आधारित है।
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