हिंदू धर्म में मंत्र का महत्व क्या है?
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हिंदू धर्म में मंत्र का अर्थ है मन को एकाग्र करने वाली दिव्य ध्वनि। ऋग्वेद में 10,552 मंत्र हैं। 'ॐ' सबसे मूल मंत्र है। गीता (10/25) में श्रीकृष्ण ने कहा — 'यज्ञानां जपयज्ञोऽस्मि' — सभी यज्ञों में जपयज्ञ मैं हूँ।
- 1मन की एकाग्रता — जप से चित्त स्थिर होता है
- 2ईश्वर से संबंध — इष्ट देवता का नाम जपने से उनसे योग
- 3पाप-नाश — शास्त्रों में मंत्र जप से पाप क्षय का वर्णन
- 4शक्ति का संचार — मंत्र की ध्वनि-तरंगें सूक्ष्म शरीर को सक्रिय करती हैं
- 5मोक्ष की प्राप्ति — ब्रह्म-मंत्र जप से मोक्ष
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