कृष्ण नाम जप के लिए तुलसी माला क्यों प्रयोग करते हैं?
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पद्म पुराण: तुलसी = वृन्दा, विष्णु को सर्वाधिक प्रिय। 'बिना तुलसी पूजा अपूर्ण।' शुद्धता, विशेष ऊर्जा, गौड़ीय: कंठी = शरणागति। स्कंद पुराण: 'तुलसी माला = मंत्र सिद्धि।' कृष्ण/विष्णु = तुलसी। शिव = रुद्राक्ष। गणेश = तुलसी वर्जित।
- 1विष्णु/कृष्ण को सर्वाधिक प्रिय: 'तुलस्यमृतजन्मासि' — तुलसी अमृत से उत्पन्न। विष्णु प्रसन्नता हेतु तुलसी अनिवार्य।
- 2शुद्धता: तुलसी = सबसे पवित्र वनस्पति। उसके स्पर्श से माला शुद्ध।
- 3ऊर्जा: तुलसी काष्ठ = विशेष ऊर्जा — मंत्र शक्ति बढ़ती है।
- 4वैष्णव परंपरा: गौड़ीय वैष्णव में तुलसी माला (कंठी) गले में पहनना = विष्णु शरणागति का चिह्न।
- 5आयुर्वेदिक: तुलसी = रोग नाशक, शांतिदायक।
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