मंदिर में पहली बार जाने वाले बच्चे का क्या संस्कार करें?
की चेकलिस्ट
निष्क्रमण संस्कार (16 में से): शिशु 3-4 माह बाद प्रथम मंदिर। विधि: शुभ मुहूर्त → स्नान+नवीन वस्त्र+काजल → देवता दर्शन → पुजारी आशीर्वाद+कुंकुम → चरणामृत (बूँद) → संकल्प (माता-पिता) → दान। सूर्य दर्शन (निष्क्रमण मूल)। सावधानी: भीड़/धुआँ/शोर से बचाएँ।
- 1शुभ मुहूर्त (ज्योतिषी/पंचांग)
- 2शिशु स्वस्थ हो (बीमार/बुखार = स्थगित)
- 3सूतक अवधि (10-12 दिन + 40 दिन) समाप्त
- 4स्नान कराएँ
- 5नवीन/स्वच्छ वस्त्र पहनाएँ
- 6माथे पर काजल/काला टीका (नज़र रक्षा)
- 7कुछ परम्पराओं में: कान में सोने की बाली/सुरक्षा ताबीज
- 8माता-पिता शिशु को गोद में लें
- 9देवता के सामने आएँ
- 10शिशु को देवता की ओर दिखाएँ — 'प्रथम दर्शन'
- 11पुजारी से आशीर्वाद + कुंकुम/विभूति माथे पर
- 12चरणामृत — शिशु के होंठों पर (बूँद भर)
- 13प्रसाद — शिशु के हाथ में (प्रतीकात्मक)
- 14अन्नदान/वस्त्रदान/दक्षिणा — शिशु के नाम से
- 15गरीब बच्चों को मिठाई/वस्त्र = विशेष शुभ
- 16भीड़/शोर से बचाएँ
- 17धूप/अगरबत्ती का धुआँ शिशु से दूर
- 18घंटा/शंख ध्वनि — शिशु डर सकता है
- 19शिशु रोए तो — बाहर ले जाएँ, जबरदस्ती न करें
- 20गर्मी/ठंड — मौसम अनुकूल तैयारी
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श्रेणी
मंदिर संस्कार
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